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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) समर्थित प्रौद्योगिकियां पर्यावरण के प्लास्टिक प्रदूषण के लिए समाधान लेकर आती हैं

ऑनलाइन डेस्क, 5 जून 2023: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा समर्थित कई प्रौद्योगिकियां हमें प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने, उसके पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण के माध्यम से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए तैयार कर रही हैं और जिससे सतत विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

इनमें से कई तकनीकों का उपयोग प्रायोगिक (पायलट) मानकों  पर किया जा रहा है और उन्हें बढ़ाने से इस बढ़ती चुनौती से राहत मिल सकती है।

विभाग का प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण प्रभाग सामग्री, उपकरणों और प्रक्रियाओं सहित प्रौद्योगिकी विकास परियोजनाओं का वित्त पोषण  देता हैI

पायलट आधार पर बना सचल संयंत्र (मोबाइल प्लांट) प्लास्टिक अपशिष्ट  को ईंधन में परिवर्तित करता है। विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक अपशिष्ट/कचरे को अधिकतम कार्बन पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) के साथ कार्बन- संघनित (डेंसिफाइड) हाइड्रोकार्बन –तेल (एचसी-ऑयल) में परिवर्तित करने के लिए स्वदेशी रूप से डिज़ाइन की गई प्रक्रिया का उपयोग करके एक पायलट स्केल वाहन-पर स्थापित सचल संयंत्र (माउंटेड मोबाइल प्लांट) विकसित किया गया है। एक चयनित, पुन: चक्रण योग्य, पुन: प्रयोज्य, मजबूत, गैर-विषैले और लागत प्रभावी  उत्प्रेरक की उपस्थिति में कम कठोर परिस्थितियों में संचालित यह संयंत्र अपशिष्ट प्लास्टिक को ईंधन में बदलने के लिए कम लागत वाला विकल्प लेकर आता है।

इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईसीटी) मुंबई के प्रोफेसर अनिरुद्ध बी पंडित ने आईसीटी-पॉली ऊर्जा नामक एक प्रक्रिया विकसित की है जो कई प्रकार के पॉली-ओलेफिनिक प्लास्टिक कचरे के उत्प्रेरकीय तापीय द्रवीकरण (कैटेलिटिक थर्मो लिक्विफिकेशन –सीटीएल) से 30 मिनट में 300 सी एचसी-ऑइल के लिए स्वदेशी रूप से तैयार पेटेंट कराए गए कॉपर@टाइटेनियमडाइऑक्साइड (Cu@TiO2) उत्प्रेरक का उपयोग करती है। यह प्रक्रिया 85 प्रतिशत से अधिक फीडस्टॉक रूपांतरण की ओर ले जाती है, और उच्च गुणवत्ता वाले कार्बन (सी) और हाइड्रोजन (एच) तत्वों ने एचसी-ऑयल को 42 एमजे/किग्रा के कैलोरी मान के साथ समृद्ध किया है। भाप और शक्ति उत्पन्न करने के लिए  इस ईंधन को जलाया जा सकता है।

प्लास्टिक कचरे के उत्प्रेरकीय तापीय द्रवीकरण (कैटेलिटिक थर्मो लिक्विफिकेशन –सीटीएल) के लिए मिश्रित पॉली ओलेफिनिक प्लास्टिक कचरे के नमूनों की अलग-अलग रचनाओं की जांच की गई और यह पता चला कि 80 प्रतिशत से अधिक एचसी-तेल उत्पादन के साथ सीटीएल प्रक्रिया का उपयोग करके प्लास्टिक कचरे के सभी संयोजनों को द्रवीभूत (लिक्वीफाईड) किया जा सकता है।

तापीय –अपघटन (पाइरोलिसिस) और गैसीकरण जैसी पारंपरिक तकनीकों की तुलना में, सीटीएल प्रक्रिया को मध्यम परिचालन स्थितियों के कारण काफी कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

इसके अलावा, सचल संयंत्र (मोबाइल प्लांट) प्लास्टिक अपशिष्ट को ईंधन में परिवर्तित करता हैऔर ऐसा सचल संयंत्र संचालन और समग्र प्रक्रिया अर्थतन्त्र के मामले में कई प्रकार के लाभ प्रदान करता है।

विज्ञानं और प्रौद्योगिकी प्रभाग (डीएसटी) के समर्थन से विकसित यह पॉली-ऊर्जा प्रक्रिया प्लास्टिक अपशिष्ट /कचरे को बिजली में बदलने के लिए एक दीर्घकालिक, लचीला, सुविधाजनक, ऊर्जा कुशल और पर्यावरण की दृष्टि से उत्तरदायी उपाय  उपलब्ध कराती है।

100 किग्रा/दिन प्लास्टिक कचरे को हाइड्रोकार्बन तेल में बदलने के लिए प्रायोगिक आधार पर किसी सचल वाहन पर स्थापित संयंत्र (पायलट स्केल व्हीकल माउंटेड प्लांट) का निर्माण किया जा रहा है और इसके 2023 के अंत तक तैयार होने की सम्भावना  है ।

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