
एलबर्ट एक्का पार्क में 51वां विजय दिवस
ऑनलाइन डेस्क, 16 दिसंबर, 2022। भारतीय जवानों का शौर्य बेमिसाल है। वे कुछ भी असंभव करने को तैयार रहते हैं। भारतीय सैनिकों के शौर्य और स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस के कारण बांग्लादेश 1971 में स्वतंत्रता प्राप्त करने में सफल रहा।
यह बात आज लिचुबगान के एलबर्ट एक्का पार्क में आयोजित 51वें विजय दिवस समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री प्रो. डॉ. माणिक साहा ने कही. समारोह के पहले मुख्यमंत्री एल्बर्ट ने एक्का पार्क में 1971 के स्वतंत्रता सेनानी स्मारक स्तंभ पर माल्यार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मुक्ति संग्राम में योगदान देने वाले वीर जवानों, समाजसेवियों और उनके परिवारों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए। अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और बांग्लादेश में भाषा और संस्कृति सहित कई चीजें समान हैं।
1971 के मुक्ति संग्राम में बांग्लादेश की जीत न केवल बांग्लादेश की जीत है बल्कि भारत की भी जीत है। मुख्यमंत्री ने मुक्ति संग्राम के भयावह दिनों को याद किया।
उन्होंने कहा कि उस युद्ध में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने भारतीय सेना और स्वतंत्रता सेनानियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। जो भारतीय सैनिकों के शौर्य, स्वतंत्रता सेनानियों के पराक्रम और भारत के उदारवाद के कारण ही संभव हो पाया है।
हमें इस इतिहास को जानना चाहिए। उन्होंने अगली पीढ़ी से इस इतिहास के बारे में जानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के भारत के साथ ऐतिहासिक संबंध और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।
इस संदर्भ में उन्होंने भारत-बांग्लादेश मैत्री सेतु, त्रिपुरा के साथ बांग्लादेश रेल संपर्क आदि पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में यदि इन सभी परियोजनाओं का शुभारंभ किया जाता है तो बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध और मजबूत होंगे।
इस अवसर पर ब्रिगेडियर नीलेश चौधरी ने स्वागत भाषण दिया। अगरतला स्थित बांग्लादेश के सहायक उच्चायुक्त आरिफ मोहम्मद ने भी बात की सूचना एवं संस्कृति विभाग मंत्री सुशांत चौधरी, मुख्य वन संरक्षक के. एस। शेट्टी, ब्रिगेडियर बी. एस। गुलेरिया एट अल।







