
भाजपा को रोकने के लिए सीटों के बंटवारे को तैयार माकपा, कांग्रेस के साथ चल रही बातचीत
अगरतला: आगामी नगर निकाय एवं शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा के खिलाफ विपक्षी मतों के बंटवारे को रोकने के लिए माकपा कांग्रेस के साथ सीटों के समझौते की दिशा में आगे बढ़ रही है। भाजपा को हराने के लिए सभी गैर-भाजपा वोटों को एकजुट करना ही पार्टी का मुख्य लक्ष्य है। यह बात माकपा के प्रदेश सचिव जितेंद्र चौधरी ने कही।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद होना स्वाभाविक है। हालांकि, व्यापक राजनीतिक हित को ध्यान में रखते हुए इन मतभेदों को दूर कर संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए जितेंद्र चौधरी ने बताया कि कांग्रेस के साथ सीटों के तालमेल को लेकर बातचीत जारी है। आगामी 10 नवंबर को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख को ध्यान में रखते हुए आपसी चर्चा के बाद सीटों के समझौते पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा को पराजित करने के लिए जरूरत पड़ने पर माकपा एक-दो कदम पीछे हटकर सीटें छोड़ने के लिए भी तैयार है।
जितेंद्र चौधरी ने कहा कि आगामी चुनाव में विपक्षी मतों का विभाजन भाजपा की जीत का रास्ता और आसान बना सकता है। इसलिए पार्टीगत स्थिति और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विपक्षी एकता कायम करने पर जोर दिया जा रहा है। माकपा किसी भी सूरत में भाजपा को वॉकओवर देने के पक्ष में नहीं है।
इस बीच, माकपा ने पहले ही कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं। जितेंद्र चौधरी ने बताया कि विशेष रूप से उन सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए हैं, जहां विपक्षी दलों का कोई प्रत्याशी नहीं है। इसका उद्देश्य भाजपा को निर्विरोध जीतने का अवसर नहीं देना है।
उनके अनुसार, चुनावी मुकाबले में भाजपा को हर सीट पर चुनौती देना विपक्ष की राजनीतिक जिम्मेदारी है।
सीटों के बंटवारे को लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद होने के बावजूद उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद जताई। उनका कहना है कि भाजपा के खिलाफ प्रभावी राजनीतिक प्रतिरोध खड़ा करने के लिए विपक्षी मतों की एकजुटता बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से कांग्रेस के साथ बातचीत जारी है।
कुल मिलाकर, आगामी नगर निकाय एवं शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर विपक्षी खेमे में सीटों के तालमेल की गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब राजनीतिक गलियारों की नजर 10 नवंबर को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख से पहले माकपा और कांग्रेस के बीच होने वाले समझौते के अंतिम स्वरूप पर टिकी है।








