
बिजली का टैरिफ तय करने में राज्य सरकार का कोई रोल नहीं: बिजली मंत्री
ऑनलाइन डेस्क, 11 अगस्त, 2026: पिछले कुछ दिनों से राज्य में बिजली के टैरिफ को लेकर बिजली कंज्यूमर्स में नाराजगी की खबरें अलग-अलग मीडिया में छप रही हैं। राज्य सरकार भी इस बात से वाकिफ है और सरकार अगले कुछ दिनों में बिजली कंज्यूमर्स के लिए पॉजिटिव कदम उठाएगी। क्योंकि यह सरकार लोगों की हितैषी सरकार है। बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने आज सेक्रेटेरिएट प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हाल ही में इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा की अध्यक्षता में बिजली मंत्री, वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के सचिवों के साथ एक मीटिंग हुई थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिजली बिल तय करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाते हुए बिजली मंत्री ने कहा कि रेगुलरिटी कमीशन बिजली का टैरिफ तय करता है। यह एक निष्पक्ष संस्था है। बिजली का टैरिफ तय करने से पहले कमीशन अलग-अलग मीडिया में टैरिफ के बारे में डिटेल्ड नोटिफिकेशन पब्लिश करता है। इस मामले में किसी व्यक्ति या संगठन की मांग या सुझाव के आधार पर आयोग बिजली बिल में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर विचार करता है और फाइनल बिजली बिल के निर्धारण के लिए कॉरपोरेशन को भेजता है। पावर कॉरपोरेशन फिक्स्ड चार्ज, फ्यूल और पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट और आयोग द्वारा निर्धारित बिजली टैरिफ को जोड़कर फाइनल बिजली बिल निर्धारित करता है। इस मामले में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है।
यानी बिजली बिल निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी तरह से आयोग और कॉरपोरेशन द्वारा मैनेज की जाती है। उन्होंने कहा कि पावर कॉरपोरेशन 2008 से इसी तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में 10 लाख 68 हजार ग्राहक हैं। इसमें से 4 लाख से ज्यादा ग्राहकों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। 1 लाख 64 हजार घरों में प्री-पेड मीटर लगाए जा चुके हैं। बिजली मंत्री ने आगे कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में 2015 में राज्य में 80 करोड़ 7 लाख रुपये का वर्क ऑर्डर जारी किया गया था। काम पूरा करने की समय सीमा 2 साल थी। मार्च 2015 से जून 2022 तक की CAG रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्क ऑर्डर के आधार पर लगाए गए कोई भी मीटर अभी चालू हालत में नहीं हैं। बिजली मंत्री ने कहा कि डिपार्टमेंट के सभी लेवल के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इस साल मई से जिन कस्टमर्स को अजीब बिजली बिल मिले हैं, उनकी पूरी जांच के बाद ही बिजली बिल स्वीकार करें।








