
GBP हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में जन्मजात दिल की बीमारी का एक और सफल इलाज
ऑनलाइन डेस्क, 07 अगस्त, 2026: अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (AGMC) और GBP हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में राज्य की मेडिकल हिस्ट्री में एक नया मील का पत्थर साबित हुआ है। पहली बार, कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने बिना किसी ओपन हार्ट सर्जरी के दिल की एक मुश्किल बीमारी (दिल में छेद) का सफल इलाज किया है। राजनगर, उदयपुर, गोमती जिले की पूर्णिमा घोष (49) साल की थीं, जो लंबे समय से दिल की बीमारी से परेशान थीं। उन्हें सांस लेने में तकलीफ और बार-बार सीने में दर्द की समस्या थी। 16 जुलाई को उनके घरवाले उन्हें GBP हॉस्पिटल लाए। सबसे पहले, कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनिंद्य सुंदर त्रिवेदी ने मरीज की हालत देखी और कुछ शुरुआती टेस्ट करने की सलाह दी।
टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर, डॉ. त्रिवेदी ने महिला को एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) नाम की जन्मजात दिल की बीमारी होने का पता लगाया। इस तरह की समस्या में दिल के ऊपरी दो चैंबर (दायां और बायां) एट्रियम के बीच में छेद हो जाता है। डॉ. त्रिवेदी ने महिला की दिल की इस समस्या में दखल देने का फैसला किया। उस फैसले के मुताबिक, 31 जुलाई को डॉ. त्रिवेदी की अगुवाई में एक मेडिकल टीम ने बिना ओपन सर्जरी के खून की नसों के ज़रिए इस बहुत मुश्किल इलाज को सफलतापूर्वक पूरा किया।
करीब दो घंटे तक चले इस प्रोसीजर से मरीज़ के दिल के छेद को सफलतापूर्वक बंद कर दिया गया। नतीजतन, पूर्णिमा घोष पूरी तरह ठीक हो गईं और उनकी सांस लेने की दिक्कत और सीने में इन्फेक्शन खत्म हो गया। इसके बाद, महिला को 5 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस सफल इलाज में डॉ. अनिंद्य सुंदर त्रिवेदी की मदद मिली। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राकेश दास और डॉ. मन्ना भट्टाचार्य। एनेस्थीसिया टीम में कंसल्टेंट कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. रिमझिम चकमा और कंसल्टेंट एनेस्थेटिस्ट डॉ. मोनिमॉय देबबर्मा शामिल थे।
इस ट्रीटमेंट प्रोग्राम में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सम्राट दास, डॉ. अरस्तू त्रिपुरा, डॉ. खमिली देबबर्मा और डॉ. देबाशीष रियांग ने भी हिस्सा लिया। इको टेक्नीशियन किशन रॉय थे, कैथलैब और टेक्निकल टीम में नर्सिंग ऑफिसर देबब्रत देबनाथ, प्राणकृष्ण देव, मानस दत्ता, तितिक्षा मजूमदार और टेक्नीशियन संजय घोष और अरिजीत पाल के साथ दूसरे हेल्थ वर्कर शामिल थे। ध्यान देने वाली बात है कि प्राइवेट हॉस्पिटल में ऐसे ट्रीटमेंट में आमतौर पर 4 से 5 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है। लेकिन AGMC और GBP हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत स्कीम के तहत, मरीज़ के सभी टेस्ट और ट्रीटमेंट पूरी तरह से फ्री किए गए हैं।
GBP हॉस्पिटल के मॉडर्न मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस्ड कैथ लैब फैसिलिटी, स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की एक्सपर्टीज़ और राज्य सरकार के लोगों को ध्यान में रखकर चलाए जा रहे हेल्थ सर्विस प्रोग्राम से आम लोगों को सरकारी हॉस्पिटल में वर्ल्ड-क्लास मेडिकल सर्विस मिल रही हैं। यह कामयाबी राज्य के हेल्थ सिस्टम की तरक्की का एक शानदार उदाहरण है और सभी के लिए आसान, सस्ती और बेहतर हेल्थकेयर पक्का करने के सरकार के पक्के इरादे का एक शानदार उदाहरण है। यह खबर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने दी।







