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स्टूडेंट्स को खुशी भरे माहौल में शिक्षा देने से उनका सही मानसिक विकास होता है: मुख्यमंत्री

प्रगति त्रिपुरा, 09 फरवरी, 2026: टीचर समाज की रीढ़ और भविष्य बनाने वाले लीडर होते हैं। आज के स्टूडेंट्स ही भविष्य में देश के डायरेक्टर हैं। इसलिए, इंस्टीट्यूशनल शिक्षा के साथ-साथ टीचर्स को स्टूडेंट्स के मूल्यों, हेल्दी और सुंदर मानसिक विकास का रास्ता बनाने की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने यह बात आज अगरतला के प्रज्ञा भवन में नेशनल सेंटर फॉर स्कूल लीडरशिप (NCSL), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA) दिल्ली और राज्य NCERT द्वारा चलाए जा रहे स्कूल लीडरशिप एकेडमी द्वारा मिलकर आयोजित 3 दिन के रीजनल स्कूल लीडरशिप वर्कशॉप और रिव्यू प्रोग्राम का उद्घाटन करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हेल्दी और सुंदर समाज बनाने के लिए पढ़ाने के साथ-साथ टीचर्स को समाज के लिए कुछ अच्छा करने की सोच के साथ आगे आना चाहिए। स्टूडेंट्स को खुशी भरे माहौल में शिक्षा देने से उनका सही मानसिक विकास होता है।

इसके लिए हर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को अपनी मेंटल हेल्थ का रिव्यू करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कहते हैं, उसे करना चाहिए। विकसित भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने छात्रों और पढ़े-लिखे युवाओं के लिए ‘परीक्षा पे चर्चा’ समेत कई प्रोग्राम शुरू किए हैं। नई शिक्षा नीति अपनाई गई है, ताकि छात्रों को भविष्य में फायदा हो सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि पढ़े-लिखे युवा देश और दुनिया के सबसे अच्छे ह्यूमन रिसोर्स हैं। विकसित भारत बनाने के लिए इस रिसोर्स को सही दिशा में लगाना होगा। साइंस पर आधारित शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को देश की संस्कृति, परंपरा और विरासत से जोड़े रखने की कोशिश होनी चाहिए। इसके साथ ही शिक्षकों को भी पढ़ाने के मामले में खुद को समय के साथ अपडेट रखना चाहिए। राज्य सरकार ने छात्रों के वर्तमान और भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। प्रोजेक्ट को लागू करने में सही निगरानी रखी जानी चाहिए। एक समय था, जब भारत का शिक्षा सिस्टम और देश के अलग-अलग शिक्षण संस्थान दुनिया भर में मशहूर थे। लेकिन गुलामी और विदेशी हमलों ने उन्हें खत्म कर दिया। प्रधानमंत्री शिक्षा के प्रसार में उस गर्व को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।

राज्य सरकार भी समय पर शिक्षा व्यवस्था के जरिए इसकी भागीदार बनना चाहती है। राज्य सरकार इसी लक्ष्य के साथ काम कर रही है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. मिलिंद रामटेके ने कहा कि राज्य के स्कूलों में सही तरीके से पढ़ाने के लिए निपुण त्रिपुरा, सुपर-30 समेत कई प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इसके अलावा राज्य के 12 हजार शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए कई पुरस्कार भी दिए गए हैं। उन्होंने छात्रों को शिक्षा देने में शिक्षकों और अभिभावकों के बीच सही तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया। कार्यक्रम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन की वाइस चांसलर प्रोफेसर शशिकला वनंजारी ने भी बात की। एससीईआरटी के डायरेक्टर एल डार्लोंग ने स्वागत भाषण दिया। विशेष अतिथियों में स्कूल और बेसिक शिक्षा विभाग के डायरेक्टर राजीव दत्ता, कोकबोरक और अन्य पिछड़ी भाषा विभाग के डायरेक्टर आनंदहारी जमातिया और एनसीएसएल के प्रोफेसर डॉ. संतबाना जी मिश्रा शामिल थे।

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