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ईएनटी और सर्जनों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री, राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आम आदमी को सस्ती और बेहतर चिकित्सा सेवाएँ मिलें

ऑनलाइन डेस्क, 14 नवंबर, 2025: राज्य सरकार राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को समाज के हाशिए पर खड़े तबके तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के कारण, मरीजों का बाहर जाने का रुझान भी पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा ने आज प्रज्ञा भवन में भारत के ओटोलैरिंगोलॉजिस्ट्स की उत्तर पूर्वी शाखा के 36वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजिस्ट्स उत्तर पूर्वी शाखा उत्तर पूर्वी क्षेत्र के 8 राज्यों के ईएनटी सर्जनों से मिलकर बना एक संगठन है। इस संगठन का गठन 1985 में हुआ था। पिछले साल इसका आयोजन असम के शिवसागर में हुआ था। त्रिपुरा में इस संगठन का अंतिम सम्मेलन 2014 में आयोजित किया गया था। यह प्रमुख आयोजन 11 वर्षों के बाद राज्य में पुनः आयोजित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा पेशा केवल एक पेशा नहीं है, यह मानवता की एक महान सेवा है। और उस सेवा में ईएनटी डॉक्टरों की भूमिका अद्वितीय है। कान, नाक और गले के रोग हमारे दैनिक जीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी को अपने जीवन में किसी न किसी मोड़ पर ईएनटी डॉक्टरों की आवश्यकता होती है। वर्तमान विश्व में चिकित्सा विज्ञान निरंतर उन्नत हो रहा है। आधुनिक तकनीक, माइक्रोसर्जरी, लेजर तकनीक और रोबोटिक सर्जरी जैसी नवीन चिकित्सा प्रणालियाँ ईएनटी उपचार को और अधिक प्रभावी बना रही हैं।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष, इस सम्मेलन में प्रख्यात ईएनटी सर्जन और राष्ट्रीय स्तर के संसाधन व्यक्ति भाग ले रहे हैं जो अपनी वैज्ञानिक जानकारी प्रस्तुत करेंगे, जिससे राज्य के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में ईएनटी सर्जनों का ज्ञान और कौशल और समृद्ध होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस सम्मेलन में भाग लेने वाले डॉक्टरों के बीच नए ज्ञान, अनुसंधान और अनुभव का आदान-प्रदान होगा, जिससे भविष्य में राज्य और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और समृद्ध होगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर आम आदमी को सस्ती और बेहतर चिकित्सा सेवाएँ मिलें। और यह लक्ष्य डॉक्टरों के अथक परिश्रम और समर्पण के बिना साकार नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रगति पर प्रकाश डाला और कहा कि अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज और जीबीपी अस्पताल सहित पूरे राज्य में चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 15 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में एम्स और राज्य स्वास्थ्य विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज और जीबीपी अस्पताल में बिस्तरों की संख्या 727 से बढ़ाकर 1,413 कर दी गई है। इस बीच, एजीएमसी और जीबीपी अस्पतालों में क्रिटिकल केयर ब्लॉक और संचारी रोग केंद्र तथा दो विशेष वार्डों की आधारशिला रखी गई।

साथ ही, मणिपुर में शिजा अस्पताल और अनुसंधान संस्थान की आधारशिला रखने के साथ ही राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के मानचित्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में किडनी प्रत्यारोपण जैसी जटिल सर्जरी भी की जा रही है। इसके अलावा, राज्य में अंगदान और प्रत्यारोपण, जिसमें लिवर और हृदय प्रत्यारोपण भी शामिल हैं, के लिए पहल चल रही है।

मुख्यमंत्री ने अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज और जीबीपी अस्पताल में रोगी सहायकों को 10 रुपये में दोपहर का भोजन उपलब्ध कराने, भारत माता कैंटीन और रैन बसेरा स्थापित करने, स्नातकोत्तर स्तर पर डॉक्टरों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने, अगरतला सरकारी डेंटल कॉलेज के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए कॉलेज में लेजर उपचार और 3डी प्रिंटिंग लैब शुरू करने, बीडीएस पाठ्यक्रम में सीटों की संख्या बढ़ाने, विभिन्न जिलों में ट्रॉमा केयर स्थापित करने आदि जैसे विभिन्न सफल कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के परिणामस्वरूप राज्य में शिशु मृत्यु दर के साथ-साथ मातृ मृत्यु दर में भी काफी कमी आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल अगरतला ही नहीं, राज्य सरकार जिला और उप-मंडल अस्पतालों के बुनियादी ढांचे का विकास और सेवाओं का विस्तार भी कर रही है।

एजीएमसी और जीबीपी अस्पतालों में 200 बिस्तरों वाले मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विभाग स्थापित करने की पहल की गई है। नेत्र उपचार सेवाओं के लिए अगरतला में 100 बिस्तरों वाला तृतीयक नेत्र देखभाल अस्पताल स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन सिर्फ चिकित्सा विज्ञान के विकास पर चर्चा तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने सम्मेलन की सफलता की कामना की। गौरतलब है कि आज के कार्यक्रम में तीन ईएनटी डॉक्टरों को उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने उन्हें स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में संगठन के आयोजन अध्यक्ष डॉ. शंकर चक्रवर्ती ने स्वागत भाषण दिया। स्वास्थ्य विभाग की सचिव किरण गीतो, प्रोफेसर डॉ. बिराज दास, डॉ. अंजन ज्योति भुइयां, डॉ. शुभमय चक्रवर्ती आदि ने भी अपने विचार रखे। आयोजन सचिव डॉ. बिधान दास ने धन्यवाद ज्ञापन किया। साथ ही स्वास्थ्य निदेशक डॉ. देबाश्री देबबर्मा, चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक प्रोफेसर डॉ. एच. पी. शर्मा, डॉ. अंजन दास आदि उपस्थित थे।

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