
64वां राज्य स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह, शिक्षक समुदाय विद्यार्थियों के जीवन पथ पर उनका मार्गदर्शक और सलाहकार तथा जीवन निर्माण का मुख्य वास्तुकार है: मुख्यमंत्री
ऑनलाइन डेस्क, 05 सितंबर, 2025: शिक्षक समुदाय विद्यार्थियों के जीवन पथ पर उनका मार्गदर्शक और सलाहकार तथा जीवन निर्माण का मुख्य वास्तुकार है। माता-पिता के बाद शिक्षकों का सभी के जीवन में एक विशेष स्थान है। केवल शिक्षक ही अपने विद्यार्थियों को नैतिकता, शिष्टाचार और न्याय की शिक्षा देकर उन्हें सच्चा इंसान बना सकते हैं। जो भविष्य में इस राज्य और देश को चलाने के मुख्य वास्तुकार होंगे। आज रवींद्र शताब्दी भवन में 64वें राज्य स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक और विश्वविख्यात शिक्षक थे। जो हमेशा एक शिक्षक के रूप में अपना परिचय देने में गर्व महसूस करते थे। उनके करियर का अध्ययन करके ही शिक्षण जैसे महान पेशे की सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हर कोई भावी पीढ़ी के प्रति जिम्मेदारी की भावना से शिक्षण पेशे में शामिल होता है। कार्यक्रम की चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों को एक मैत्रीपूर्ण वातावरण में मानसिक और भावनात्मक रूप से जोड़कर उन्हें शिक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। शिक्षक समुदाय को हमेशा विद्यार्थियों को अच्छे कार्यों के लिए प्रोत्साहित और सहयोग करना चाहिए। तभी वे भविष्य में एक व्यक्ति के रूप में जीवन के उतार-चढ़ाव का साहसपूर्वक सामना कर पाएंगे और समाज को राह दिखा पाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में यह भी कहा कि जो शिक्षक पाठ्यपुस्तक के ज्ञान से परे विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं, वे ही सच्चे शिक्षक हैं। शिक्षण एक महान पेशा है। इस पेशे की तुलना किसी अन्य पेशे से नहीं की जा सकती। क्योंकि शिक्षक ही भावी पीढ़ी का निर्माण करते हैं। जो पूरे राष्ट्र का भविष्य निर्धारित करती है। इसलिए शिक्षकों को हमेशा समर्पण की भावना से काम करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षण पेशे में मानसिक मजबूती और पेशे के प्रति प्रेम नितांत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि जो लोग इस पेशे से जुड़े हैं, वे हमेशा अपने-अपने क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करते रहेंगे। कार्यक्रम का आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया गया था।
विभाग की ओर से इस वर्ष का पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर पुरस्कार प्रतिष्ठित शिक्षाविद् डॉ अतुल देबबर्मा को, महारानी तुलसीवती पुरस्कार डीसी पारा हेमंत स्मृति स्कूल की प्रिंसिपल प्रणति देबबर्मा को और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी पुरस्कार प्रतिष्ठित शिक्षक और शिक्षाविद् समीर चक्रबती को दिया गया। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न उच्च और स्कूल शिक्षण संस्थानों के 36 शिक्षकों को ‘शिक्षक’ पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ) माणिक साहा ने सभी पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को पुरस्कार सौंपे। कार्यक्रम में बोलते हुए, मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ) माणिक साहा ने कहा कि शिक्षक छात्रों के लिए रोल मॉडल होते हैं। शिक्षक समुदाय एक पेड़ की जड़ों की तरह है। जिनका काम अपने पूरे सार के साथ इस समाज का निर्माण करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन काल में, भारत ज्ञान, शिक्षा और विज्ञान का केंद्र था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्पित प्रयासों से देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है, जो भविष्य में देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाएगी। राज्य के शैक्षणिक बुनियादी ढांचे के विकास की हकीकत पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य में सरकारी और निजी स्तर पर कई विश्वविद्यालय हैं। भविष्य में महिला विश्वविद्यालय शुरू करने का मुद्दा भी काफी आगे बढ़ चुका है। वर्तमान में राज्य में एमबीबीएस, डेंटल, बीएससी नर्सिंग, एएनएम, जीएनएम और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के अपार अवसर हैं।
राज्य सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों के बुनियादी ढांचे के विकास पर भी काफी जोर दिया है। नतीजतन, टीआईटी और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए नए भवनों का निर्माण किया जा रहा है। 387 स्कूलों में बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है। 292 और किए जाएंगे। मुख्यमंत्री कन्या आत्मनिर्भर योजना के तहत 140 लोगों को छुट्टी दी गई है वित्तीय वर्ष 2024-25 में 12 विद्यालयों को हाईस्कूल और 5 विद्यालयों को हायर सेकेंडरी स्कूलों में अपग्रेड किया गया है। उन्होंने शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे निपुण त्रिपुरा, मुकुल, विद्या सेतु, महार्षि, पीएम पोषण, सुपर 30 आदि पर भी विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री का मानना है कि शिक्षकों के ईमानदार प्रयासों के कारण इस वर्ष विद्या ज्योति स्कूलों के परिणाम अच्छे रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शिक्षक समुदाय आने वाले दिनों में छात्रों के चरित्र और प्रतिभा को निखारने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। कार्यक्रम पर चर्चा के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव रावल हेमेंद्र कुमार ने कहा कि शिक्षा प्रदान करने के अलावा, छात्रों के जीवन को आकार देने में शिक्षकों की भूमिका होती है।
वर्तमान समय में विज्ञान आधारित, नवीन, तकनीकी शिक्षा पर सबसे अधिक जोर दिया जा रहा है। इसलिए शिक्षकों को भी शिक्षा प्रदान करने में खुद को अपडेट रखना चाहिए। कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में उनके दर्शन और राज्य की शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर एक संक्षिप्त सूचनात्मक वीडियो दिखाया गया। स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक एन. सी. शर्मा ने कार्यक्रम में स्वागत भाषण दिया।







