
थैलेसीमिया उन्मूलन के लिए स्कूल स्तर से जागरूकता पैदा करने की जरूरत: मुख्यमंत्री
ऑनलाइन डेस्क, 14 जुलाई, 2025: थैलेसीमिया उन्मूलन के उपायों में से एक जागरूक और सतर्क रहना है। इसके साथ ही, थैलेसीमिया से निपटने में बीमारी का समय पर पता लगाना और उसका इलाज बेहद जरूरी है। आज मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा ने रवींद्र शताब्दी भवन में रोटरी क्लब ऑफ अगरतला की पहल पर थैलेसीमिया पर एक चर्चा समूह का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह का चर्चा समूह थैलेसीमिया के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने में मददगार होगा।
अगर रोटरी क्लब जैसे अन्य सामाजिक संगठन भी आगे आएं तो थैलेसीमिया के बारे में जन जागरूकता और बढ़ेगी। थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों को असहाय महसूस करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर हमें पहले से पता हो तो इस बीमारी को रोकना बहुत संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि थैलेसीमिया आमतौर पर दो प्रकार का होता है, अल्फा और बीटा थैलेसीमिया। इस रोग से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों को नियमित रक्त आधान की आवश्यकता होती है। अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण इस रोग का एक प्रभावी उपचार है। राज्य का स्वास्थ्य विभाग भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण के बारे में भी विचार कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग बाल सेवा योजना परियोजना के माध्यम से भविष्य में थैलेसीमिया रोगियों को चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने की पहल करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व थैलेसीमिया दिवस हर साल 8 मई को मनाया जाता है। उस दिन, दुनिया भर में लोगों को थैलेसीमिया रोग के बारे में जागरूक किया जाता है। भारत में लगभग 70 हजार थैलेसीमिया रोगी और लगभग 42 करोड़ थैलेसीमिया वाहक हैं।
देश में हर साल लगभग 10 हजार से 12 हजार बच्चे बीटा थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी के साथ पैदा होते हैं। राज्य में वर्तमान में लगभग 2,858 थैलेसीमिया रोगी हैं। थैलेसीमिया रोग के उन्मूलन के लिए स्कूल स्तर से जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है रोटरी क्लब अगरतला के अध्यक्ष किशलोय घोष, स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. तपन मजूमदार, डॉ. कामेश्वर सिंह एलम्बम और अन्य ने रोटरी क्लब की ओर से भाषण दिया। परिवार कल्याण एवं रोग निवारण विभाग के निदेशक डॉ. अंजन दास, पद्मश्री दीपा कर्माकर और अन्य भी उपस्थित थे। चर्चा के दौरान विभिन्न स्कूलों के छात्रों के बीच थैलेसीमिया पर एक खुली प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया।








