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त्रिपुरा साहित्य महोत्सव का उद्घाटन, सरकार राज्य के साहित्य, संस्कृति और विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है: मुख्यमंत्री

ऑनलाइन डेस्क, 22 फरवरी, 2025: मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा ने राज्य की संस्कृति, विरासत और परंपराओं को देश-विदेश के लोगों के सामने प्रदर्शित करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने आज रवींद्र शताब्दी भवन में गैर-सरकारी सांस्कृतिक संगठन ‘उड़ान’ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय त्रिपुरा साहित्य महोत्सव का उद्घाटन करते हुए यह आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य के साहित्य, संस्कृति और विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

साहित्यिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हर साल अगरतला पुस्तक मेला आयोजित किया जाता है। अगरतला के बाहर अन्य उपखंडों में भी पुस्तक मेले आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को राज्य के साहित्य और संस्कृति के विकास के लिए प्रेरित करना है। इसके अलावा, राज्य सरकार की पहल पर अटल कविता एवं साहित्य महोत्सव और नाटक महोत्सव का आयोजन किया जाता है। सूचना एवं संस्कृति विभाग भी पूरे वर्ष राज्य भर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 19 आदिवासी समुदाय हैं। अपनी स्वयं की संस्कृति के अलावा, उनमें से प्रत्येक की एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत भी है, जैसे बंगाली और मणिपुरी भाषा समूह के लोगों की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा के समय से ही देश-विदेश से कई प्रसिद्ध कलाकार, लेखक और सांस्कृतिक हस्तियां त्रिपुरा आ चुकी हैं। रवीन्द्रनाथ टैगोर का त्रिपुरा के राजपरिवार के साथ घनिष्ठ संबंध साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने त्रिपुरा की सात बार यात्रा की।

त्रिपुरा के बारे में उनका कालातीत साहित्य आज भी हमारी धरोहर है। रवि टैगोर के अलावा, बंगाली साहित्य के प्रख्यात उपन्यासकार बिभूतिभूषण बनर्जी सहित साहित्य और संस्कृति की दुनिया की प्रमुख हस्तियों ने त्रिपुरा का दौरा किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के साहित्यिक उत्सवों से भविष्य में राज्य में साहित्य और संस्कृति का दायरा बढ़ेगा। आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर उन्होंने सभी भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। तीन दिवसीय साहित्य महोत्सव के उद्घाटन समारोह में अन्य लोगों के अलावा भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा ने भी अपने विचार रखे।

मंच पर उपस्थित अन्य अतिथियों में त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. अरुणोदय साहा, प्रतिष्ठित ढाक वादक पद्म श्री गोकुल चंद्र दास, प्रतिष्ठित लेखक पद्म श्री डॉ. रवि कन्नन, अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि श्री, राज्य के प्रमुख रवींद्र शोधकर्ता विकास चौधरी, टेक्नो इंडिया यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. रतन साहा, प्रमुख खेल आयोजक रूपक साहा और उड़ान के अध्यक्ष डॉ. सुमंत चक्रवर्ती. डॉ. ने उद्घाटन समारोह में स्वागत भाषण दिया।

रणबीर रॉय. मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने कैनवास पर अपनी मातृभाषा में अपने पसंदीदा शब्द लिखकर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों ने साहित्य महोत्सव के अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया। इस वर्चुअल कार्यक्रम में तेलंगाना के राज्यपाल यशनु देबबर्मा और प्रमुख बंगाली लेखक और साहित्यकार संजीव चटर्जी ने भी शुभकामनाएं दीं।

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