
वामपंथी छात्र संगठनों ने सरकारी शिक्षा को बचाने के लिए शहर में निकाला विरोध मार्च
ऑनलाइन डेस्क, 20 जनवरी 2025: राजधानी में सोमवार को पैराडाइज चौमुहनी वामपंथी छात्र संगठन शिक्षक संकट का समाधान करने, सरकारी स्कूलों को बंद न करने तथा सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का खर्च कम करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे। यह विरोध कार्यक्रम एसएफआई और टीएसयू की मुख्यालय और डुकली संभागीय समितियों द्वारा आयोजित किया गया था। एसएफआई राज्य कमेटी सचिव संदीपन देब उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि एसएफआई और टीएसयू शिक्षा को बचाने के लिए पांच विशिष्ट मांगों को लेकर आज के विरोध मार्च का आयोजन कर रहे हैं। क्योंकि राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की कमी चरम स्तर पर पहुंच गई है।
राज्य में शिक्षकों के रिक्त पदों को तत्काल भरने की मांग की जा रही है। दूसरी ओर, राज्य में सरकारी स्कूलों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूलों को किसी भी हालत में बंद नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, छात्रों को वजीफा मिलने में परेशानी हो रही है। छात्रों की परेशानी दूर करने के लिए नियमित रूप से और समय पर वजीफा दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में छात्रों का खर्च दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
सरकार को सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा मुख्य मांग यह है कि राज्य में विद्याराज्योति परियोजना को रद्द किया जाए। इस परियोजना से छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसलिए सरकार से मांग की जा रही है कि इस परियोजना को तुरंत रद्द किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आज के आंदोलन से मांगें पूरी नहीं होंगी। इसलिए वामपंथी छात्र संगठन पूरे राज्य में आंदोलन चलाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वे छात्रों और अभिभावकों के साथ गठबंधन करके एक आंदोलन बनाने की योजना बना रहे हैं।







