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गुजरात विश्वविद्यालय के 72वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति के संबोधन का मूलपाठ (उद्धरण)

ऑनलाइन डेस्क, 19 जनवरी, 2023: सितंबर 2023 में हमें बहुत सौभाग्य मिला जब तीन दशकों के असफल प्रयासों के बाद इस देश की आधी आबादी को कम से कम एक तिहाई की सीमा तक लोकसभा का सदस्य होने की संवैधानिक मान्यता दी गई। मैं गुजरात आया हूं, गुजरात साधुवाद का पात्र है पर एक तिहाई रिजर्वेशन दिया लोकसभा में और विधानसभा में जो होरिजेंटल और वर्टिकल है और वह कानून में कब बदला, जब महामहिमा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी ने दस्तक दी।

जब मैंने इस परिसर में प्रवेश किया, तब मुझे एक अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन करने का सौभाग्य मिला। एक केंद्र का नाम भारत के दो महत्वपूर्ण सपूतों श्री अटल बिहारी वाजपेयी और श्री एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। अटल कलाम अनुसंधान केंद्र, यह समय की मांग है और यह बहुत सामयिक है। डॉ. नीरजा और पूरी टीम को बधाई। यह अनुसंधान केंद्र परिवर्तन का मुख्य केंद्र होगा, जिसका हमें सामना करना है।

डिसरप्टिव प्रौद्योगिकियों के बारे में आप सभी ने सुना होगा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग और 6जी आने ही वाले हैं। हमारे पास भारत में क्वांटम कंप्यूटिंग मिशन है, केवल कुछ ही देशों के पास है। हमारे पास हरित हाइड्रोजन मिशन है। यह आपके लिए अनुसंधान में शामिल होने और अवसरों का लाभ उठाने का समय है।

इस मंच से मैं घोषणा करता हूं, हमारे कॉर्पोरेट, उद्योग, व्यापार और व्यापार के लिए अनुसंधान और विकास के लिए संस्थान को संभालने का समय आ गया है। मैं बड़े दुःख के साथ आप सभी को बता रहा हूँ कि 2009 में भारत सरकार ने एक विदेशी विश्वविद्यालय को 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि उपलब्ध करायी थी।

मैं दुनिया में कहीं भी दान देने के खिलाफ नहीं हूं लेकिन हमारे देश में क्यों नहीं। उद्योगपति द्वारा विदेशी विश्वविद्यालय को 50 मिलियन डॉलर उपलब्ध कराए गए, मैं इसके खिलाफ नहीं हूं, लेकिन हमारे देश में भी हमारे उद्योग के लिए शैक्षिक संस्थान को संभालने का समय क्यों नहीं है, ताकि अनुसंधान और विकास के माध्यम से युवा लड़के और लड़कियां पूरी तरह से डिसरप्टिव प्रौद्योगिकियों के सकारात्मक पहलुओं का पूरी तरह से दोहन करने के लिए तैयार हो सके।

एक डीप फेक हमारी प्रतिष्ठा को बर्बाद कर सकता है, एक गलत नरेटिव एक वाइल्ड शेप ले सकता है। तुम्हें इसका मुकाबला करना होगा। आप जैसे प्रतिभाशाली दिमागों, समझदार दिमागों को उत्तर ढूंढना होगा। जब हरित हाइड्रोजन मिशन की बात आती है, तो गुजरात राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नवाचार की भूमि है। यह स्थान एक मुख्य केंद्र होना चाहिए। हरित हाइड्रोजन में लगभग 6 लाख लोगों के लिए रोजगार पैदा करने और 800000 करोड़ से अधिक का निवेश लाने की क्षमता है, आपको इस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और मुझे यकीन है कि आप करेंगे।

मैं, आप, लड़के और लड़कियों को, एक घटना बता दूं। अब्दुल कलाम इसरो का हिस्सा थे, इसरो का एक मिशन था, निदेशक का कहना है कि यह सही समय नहीं है। इसे आगे बढ़ाना चाहिए या नहीं, यह निर्णय लेने के लिए जिन चीजों की आवश्यकता होती है, डॉ. अब्दुल कलाम ने जोर देकर कहा था कि हमें आगे बढ़ना चाहिए, यह निर्णय उन्होंने लिया था। वह नंबर एक आदमी नहीं था, मिशन विफल हो गया। आमतौर पर प्रभारी व्यक्ति मीडिया को संबोधित करता है। निदेशक ने मीडिया के सामने जाकर कहा कि अगली बार हम सफल होंगे। अगली बार जब डॉक्टर अब्दुल कलाम सफल हुए तो उन्होंने जोर देकर कहा कि निदेशक मीडिया के पास जाएं।

निदेशक ने कहा नहीं डॉ. अब्दुल कलाम आप मीडिया के पास जाइए, यह हाथ पकड़ना हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के टोक्यो ओलंपिक में प्रभावी ढंग से दिखाई देता है, हमारी लड़कियों की हॉकी टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, लेकिन अंतिम चार में नहीं पहुंच सकी। माननीय प्रधानमंत्री जी ने हर महिला खिलाड़ी से बात की, उन लड़कियों की आंखों में आंसू थे, वो आंसू हीरे की तरह चमक रहे थे। 1.4 अरब लोगों के देश, जहां विश्व की आबादी का 1/6 हिस्सा रहता है, 5000 वर्षों की सभ्यता वाले देश के प्रधानमंत्री ने उनका साथ दिया है। यही वह भावना है, जिसे आप लोगों को हमेशा याद रखना चाहिए।

मेरे कहने का मतलब यह है आप कभी घबराए नहीं, कभी डरे नहीं प्रयास इसलिए मत छोड़ो की असफल हो जाएंगे। अपनी शक्ति पर विश्वास रखें यदि आप सफल नहीं होते हैं तो यह विफलता नहीं है, विफलता के डर की चपेट में या कैद में न रहें।

गांधी जी और मोदी जी जैसे लोगों की भूमि पर होना सम्मान की बात है। यहां आकर एक सकून मिलता है| प्रधानमंत्री ने ठान लिया है कि आबादी के साथ न्याय ही नहीं होगा, पूर्ण न्याय होगा और उन्होंने क्या कदम उठाए  ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’,  फिर उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी दिक्कत किसको होती है शौचालय के लिए, हर घर में शौचालय होगा, लोगों ने सोचा नहीं था। तब 130 करोड़ के देश में शौचालय कैसे बनेंगे, आज यह जमीनी हकीकत है। उन्होंने ठान ली की किलोमीटर चलकर, मैं आज राजस्थान से आया हूं मेरे से ज्यादा कौन जानता है, माताएं बहनें पानी लाती थी, अब घर-घर नल और नल में जल। चूल्हे में फुकनी कर हमारी दादी नानी बुआ बहन खाना बनाती थी आंखों में धुआं जाता था। 10 करोड़ से ज्यादा घरों को मुफ्त कनेक्शन दिया। परिवर्तन आया है जबरदस्त।

उससे भी बड़ा परिवर्तन आया बैंक में, वकील बना तब मुझे अपनी लाइब्रेरी के लिए 6000 रुपए चाहिए थे, अब मुझे उस बैंक मैनेजर की दयालुता बहुत अच्छी तरह याद है, जो इसे संभव बना सका। और अब 50 करोड़ लोगों का बैंक में खाता होना, बैंकिंग समावेशन होना और सरकारी सहायता अब बिना कटौती के बिना बिचौलिया के शत प्रतिशत वहां पहुंचती है। यहीं कारण है कि भारत आज दुनिया की पांचवी आर्थिक महाशक्ति है। भारत आज बड़ी आर्थिक महाशक्तियों में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली आर्थिक शक्ति है। हमने कनाडा को, यूके को, फ्रांस को पछाड़ा इनसे आगे हम निकल गए और आने वाले दो-तीन साल में ही हमारी यह यात्रा विकास की यात्रा आर्थिक प्रगति की यात्रा। दशक के अंत तक हम जापान और जर्मनी की अर्थव्यवस्थाओं को पछाड़कर तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था होने का गौरव प्राप्त कर लेंगे।

अमृत ​​काल हमारा कर्तव्य काल है। अमृत काल में बहुत अधिक मजबूत नींव, आने वाले भारत की रखी जा चुकी है। जब भारत 2047 में अपनी आजादी का शताब्दी महोत्सव बना रहा होगा तब भारत को ऊंचाई तक पहुँचाने का पूरा भार आपके कंधों पर होगा। हम में से कुछ नहीं रहेंगे। आप पैदल सैनिक हैं, यह आपके कंधों पर होगा कि स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष में भारत दुनिया का सबसे विकसित राष्ट्र और विश्व का नेतृत्वकर्ता बनेगा और यह हमने करके दिखा दिया है।

दुनिया में भारत आज किसी का मोहताज नहीं है, हमारी विदेश नीति कितनी कारगर है कि भारत के प्रधानमंत्री ने 5000 साल की सभ्यता को दृष्टिगत करते हुए दुनिया को जो संदेश दिए। यह विस्तार का युग नहीं है, भारत ने ऐसा कभी नहीं किया, आक्रमण झेले हैं, हमारे मंदिर टूटे हैं पर भारत ने कभी भी ऐसा कोई कुकर्म नहीं किया है और दूसरा, सभी वैश्विक टकराव और मुद्दे बातचीत और कूटनीति से निर्धारित होने चाहिए तभी तो देखिए जो कुछ भारत में हो रहा है 10 साल में अलग, छोड़िए आप 6 महीने का देखिए, 6 महीने में जी-20 दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन भारत मंडपम में हुआ, जो दुनिया के 10 बड़े कन्वेंशन सेंटर्स में से एक है। भारत के प्रधानमंत्री ने विश्व के नेताओं की जब अगवानी की तो पृष्ठभूमि में क्या था,  सन टेंपल कोणार्क। विश्व के नेता जब हॉल में पहुंचे और जा रहे थे तब गैलरी से हमारी 5000 साल की संस्कृति वहां दिखाई दी।

हमारे संविधान निर्माताओं ने हमे संविधान दिया। सोच विचार कर दिया, संविधान निर्माताओं ने करीब 2 साल 11 महीने और कुछ दिन तपस्या पूर्वक संविधान सभा में काम किया, कभी कोई व्यवधान नहीं हुआ बावजूद इसके कि उनके सामने जटिल समस्याएं थीं।

वे सबसे विवादास्पद मुद्दों पर संवाद और बहस में जूझते रहे, हंगामा कभी नहीं हुआ, विघ्न कभी नहीं हुआ। जब हंगामा और विघ्न होता है, तब मेरे मन में सबसे बड़ी पीड़ा होती है और इसका समाधान आप लड़के और लड़कियो के पास है। आपको उन लोगों को जवाबदेह बनाना होगा, जो हंगामे और विघ्न को राजनीतिक व्यवस्था को हथियार बनाने में विश्वास करते हैं। ये रुकना चाहिए। हमारे प्रतिनिधियो को संविधान सभा के सदस्यों द्वारा बताए गए मूल्यों के प्रति बहुत जागृत रहना होगा।

उन्होंने जो हमें संविधान दिया उस संविधान में 22 चित्र है, 5000 साल की हमारी सांस्कृतिक विरासत की झलक, सारनाथ का अशोक चिन्ह है, गुरुकुल की परिपाटी उसमें है और जो सबसे महत्वपूर्ण भाग है उसका, जिसको कहते हैं मौलिक अधिकार, लोकतंत्र का सार, लोकतांत्रिक मूल्यों का सार उसके बिना डेमोक्रेसी अधूरी है। उस अधिकार का जो पाठ है उसके ऊपर जो चित्र है, वह चित्र राम, सीता और लक्ष्मण का है। देखिए राम, सीता, लक्ष्मण हमारे संविधान का हिस्सा हैं और जो किताबें प्रकाशित है उनमें वह चित्र क्यों नहीं है।

हमें आग्रह करना चाहिए की वह 22 चित्र आये उन चित्र के अंदर पार्ट-4 में भगवान श्री कृष्ण हैं, अर्जुन को उपदेश दे रहे हैं,  मैं भगवान श्री कृष्ण की कर्म भूमि में आज के दिन मुझे जब रामचरितमानस दिया, मैंने मन में सोचा गुजरात में हर आदमी बहुत सोच समझकर काम करता है, मौके की नजाकत देखते हुए सही।

देश और दुनिया में गुजरात को युगीन परिवर्तन के मुख्य के रूप में देखा जाता है। कुछ लोगों ने कहा कि आप उपराष्ट्रपति हैं और आपको थोड़ा राजनीति से अलग हटना है, सही बात है।
लड़के और लड़कियों, मैं राजनीति में एक हितधारक नहीं हूं, लेकिन मैं शासन में राष्ट्रवाद में एक हितधारक हूं। मैं इस बात से पीछे कैसे हट सकता हूं कि भारतीयता मेरी पहचान है इसकी अप्रत्याशित अकल्पनीय प्रगति को देखकर मैं विभूत हूं।

गुजरात की मिट्टी में कुछ खास है। क्योंकि हर कालखंड में यहां के महापुरुषों ने हमें रास्ता दिखाया है, देश का निर्माण किया है। महात्मा गांधी जी, सरदार पटेल जी और आज के युग में श्री नरेन्द्र मोदी जी और अमित शाह जी। जो कानून के विद्यार्थी हैं, हर किसी को अजीब लगता था कि आर्टिकल 370 क्या है, आर्टिकल 35ए क्या है, संविधान में जिसको अस्थायी कहा गया है, वह नासूर बन गया है और स्थायी रूप से है जो सोचा, जो कहा वह आज हकीकत है। आर्टिकल 370 संविधान में नहीं है, सरदार पटेल जी वह नहीं चाहते थे।

आपको इतिहास में थोड़ा प्रकाश डालकर बताऊंगा कि भारत के संविधान और देश के एकीकरण में दो महत्वपूर्ण बातें हैं। सरदार पटेल जम्मू-कश्मीर को छोड़कर, सभी राज्यों के एकीकरण में शामिल थे। कहीं कोई समस्या नहीं रही, बस जम्मू-कश्मीर में समस्या रही। अगर वह जम्मू-कश्मीर के एकीकरण में शामिल होते, तो मुझ पर भरोसा करें, लड़के और लड़कियों, इसमें कोई दिक्कत नहीं होती, और दूसरा हमारे भारतीय संविधान के निर्माता ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष डॉ. बीआर अंबेडकर ने अनुच्छेद 370 को छोड़कर संविधान के हर अनुच्छेद का मसौदा तैयार किया। सरदार पटेल, डॉक्टर अंबेडकर दो सिद्धांतों से संबद्ध नहीं किए गए तत्कालीन नेतृत्व द्वारा और नतीजा, उनका हल, इस कालखंड में निकला। यह कालखंड भारत के विकास का है, यह कालखंड हमारे उस उदय का है, जहां हमारी संस्थाएं नालंदा तक्षशिला थी, हमारा व्यापार दुनिया के हर कोने में था।

आज के दिन देश का नेतृत्व कहां है, राष्ट्रपति भवन में जनजाती की महिला, आपके यहां राज्यपाल रही हैं और आपको आज मैं बताता हूं प्रधानमंत्री जी नरेन्द्र मोदी जी 2014 में प्रधानमंत्री बने, आपको आश्चार्य होगा मेरी पहली मुलाकात उनसे कब हुई, मेरी उनसे पहली मुलाकात पश्चिम बंगाल के राजपाल की हैसियत से हुई।

आकाश आप सभी के लिए सीमा है, वो दिन गए जब भ्रष्टाचार, संरक्षण और सिफारिश के बिना कोई काम नहीं होता था। सत्ता के गलियारों को भ्रष्ट तत्वों से विधिवत मुक्त कर दिया गया है, वे तत्व जो निर्णय लेने में असंवैधानिक काम में संलग्न रहते थे, उनकी छुट्टी हो गई है।  जब इतना कुछ होता है, तो कुछ लोगों के मन में घबराहट आती है। वह देखते हैं कि हमारे तो अच्छे दिन चल रहे थे, अब बेचैनी के दिन आ गए हैं। वह मानकर चलते थे कि कानून हमारे तक कैसे पहुंचेगा। कानून तो हमारी मुट्ठी में है, कानून हमारी कठपुतली है। उनकी गलतफहमी दूर हो गई है। कानून से ऊपर कोई नहीं है, देश में कानून का राज है, बिना कानून के राज के प्रजातंत्र का कोई मतलब नहीं है और कानून दस्तक वहां दे रहा है उन घरों पर दे रहा है जिनको उम्मीद नहीं थी कि कानून हमारे यहां कैसे आ सकता है।

लड़के और लड़कियों, यह आपके लिए एक चुनौती है, जब कोई प्रणाली काम करती है, जब भ्रष्टाचारियों को पारदर्शी तरीके से पकड़ा जाता है, जब किसी देश में मजबूत न्यायिक प्रणाली होती है, तो नोटिस उन लोगों को जाता है जो हर चीज को सड़क पर ले जाते हैं। सोचने वाला दिमाग, खासकर युवा दिमाग और आप जैसे समझदार दिमाग को सोशल मीडिया पर आना ही चाहिए, इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है। आप अपनी उम्र और शिक्षा के आधार पर इस देश के विकास में सबसे बड़े हितधारक हैं, यह राष्ट्र मुझसे और अन्य लोगों से अधिक आपका है, आपको इस राष्ट्र को बड़ी ऊंचाइयों पर ले जाना है। आप कानून के समक्ष समानता चाहते हैं, आप शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं। नेतृत्व इसके लिए बहुत लालायित है, आपको इस अवसर पर आगे आना होगा। हमारा ऑवजर्वेंस और साइलेंस सबसे अनुचित होगा, यह आने वाले वर्षों तक आपके कानों में गूंजता रहेगा। जो कुछ भी आप कर सकते हैं, वह करें क्योंकि आपका कार्य बेहतर है, आप ही इस राष्ट्र को लक्ष्य तक ले जाने वाले हैं।

लड़के और लड़कियां, जब मैं दुनिया भर में देखता हूं, तो पहले सोचते थे कि हमारे यहां ऐसी सड़के होगी, ऐसी बिल्डिंगें  होंगी, ऐसे रेलवे स्टेशन होंगे, क्या इंटरनेट गांव तक पहुंच जाएगा और आज के दिन जो भारत को कमजोर बताते थे वह विश्व बैंक क्या कहता है, विश्व बैंक ने औपचारिक रूप से संकेत दिया है कि भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ रही है। विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे आगे है।

लड़के और लड़कियों, हमारा डिजिटल लेनदेन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक सपना, 2022 में एक जमीनी हकीकत,  संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के संयुक्त लेनदेन से चार गुना था। हमने कभी इस बारे में नहीं सोचा था कि हमारे गांव के लोगों के पास भले ही औपचारिक शिक्षा न हो, लेकिन वे आज जानते हैं कि स्मार्टफोन का उपयोग कैसे किया जाता है और 2022 में भारत में इंटरनेट की प्रति डेटा खपत का आधिकारिक आंकड़ा संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन दोनों की तुलना में अधिक था।

मैं आप सभी से अपील करता हूं, अवसरों का लाभ उठायें, अवसर बहुत हैं।

PIB

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