
राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार वितरण समारोह, सपने और पक्का इरादा मिलकर ही मनचाहा लक्ष्य हासिल करते हैं: मुख्यमंत्री
ऑनलाइन डेस्क, 18 जुलाई, 2026: असली विकास आम आदमी की ज़िंदगी में अच्छे बदलाव लाना है। इस अच्छे बदलाव में पंचायत या गांव की समिति का महत्व सबसे ज़्यादा है। पंचायतें गांव के लोगों के भरोसे और विश्वास का केंद्र होती हैं। तीन-स्तरीय पंचायत सिस्टम के जनप्रतिनिधि उस भरोसे और विश्वास के रखवाले होते हैं। मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा ने आज अरुंधतिनगर के ग्राम स्वराज भवन में आयोजित राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार वितरण समारोह का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। समारोह में मुख्यमंत्री और दूसरे मेहमानों ने अलग-अलग कैटेगरी में विजेताओं को कुल 51 पुरस्कार दिए। ये पुरस्कार पंचायतों, पंचायत समिति, जिला परिषद, अलग-अलग थीम पर आधारित खास पहल, कुशल कर्मचारियों और नए कामों के लिए दिए गए।
रूरल डेवलपमेंट (पंचायत) डिपार्टमेंट के इस इवेंट में मेहमानों ने डिपार्टमेंट की फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की सालाना रिपोर्ट वाली बुकलेट और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स 2.0 (Pi 2.0) बुकलेट भी लॉन्च की। इवेंट में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की 70 परसेंट आबादी गांवों में रहती है। इसलिए, 2047 तक एक डेवलप्ड इंडिया बनाने के लिए गांवों का डेवलपमेंट पक्का ज़रूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा आत्मनिर्भर, डिजिटल, एम्पावर्ड गांव बनाने पर ज़ोर देते हैं। क्योंकि गांव देश के डेवलपमेंट का मेन सेंटर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा त्रिपुरा राज्य की तरक्की की तारीफ़ करते हैं। हमें भी प्रधानमंत्री के इस भरोसे का सम्मान करना होगा। हमें याद रखना चाहिए कि जब सपने और पक्का इरादा साथ चलते हैं, तभी मनचाहा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेवलपमेंट के मामले में त्रिपुरा राज्य की पहचान आज पूरे देश में फैल गई है। इसी को पहचान देते हुए पिछले कुछ सालों से राज्य को सेंट्रल लेवल पर अलग-अलग डिपार्टमेंट में अवॉर्ड दिया जा रहा है। लेकिन, यह गौरव सिर्फ़ कर्मचारियों या जन प्रतिनिधियों के लिए नहीं है। यह गौरव आम लोगों के लिए भी है। क्योंकि लोगों का भरोसा जीतकर ही एक खुशहाल और विकसित गांव बनाया जा सकता है। अवॉर्ड मिलने के बाद अब सभी को और नए आइडिया के साथ काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल लेवल पर पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स 2.0 में सबसे ज़्यादा स्कोर पाने वाला गांव, ब्लॉक और ज़िला त्रिपुरा का है।
राज्य की 80 प्रतिशत पंचायतों ने ‘A’ ग्रेड हासिल किया है। यह सभी के मिलकर किए गए प्रयासों से मुमकिन हुआ है। मुख्यमंत्री ने गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, तेज़ और पारदर्शी सेवाएं देने के लिए डिजिटल रूप से मज़बूत, पर्यावरण के अनुकूल, महिला लीडरशिप डेवलपमेंट पर ज़ोर देने, इनोवेटिव कल्चर को बढ़ावा देने, रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल, वेस्ट मैनेजमेंट वगैरह की सलाह दी। उन्होंने हर गांव से किसी खास फील्ड में अपनी पहचान बनाने पर भी ज़ोर देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों को पब्लिक सर्वेंट की सोच से बाहर निकलकर चेंज मेकर और देश बनाने वाले की सोच के साथ काम करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इवेंट में 4 नेशनल अवॉर्ड पाने वालों को अवॉर्ड दिए। इनमें सिपाहीजला जिले से नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार, हेल्दी पंचायत कैटेगरी में पहला स्थान पाने वाली कंचनबाड़ी ग्राम पंचायत को दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार-2025, महिला हितैषी कैटेगरी में तीसरा स्थान पाने वाली बैकुंठपुर ग्राम समिति और नेशनल ई-गवर्नेंस कैटेगरी में दूसरा स्थान पाने वाली विजयनगर ग्राम पंचायत शामिल हैं।
इसके अलावा, राज्य स्तरीय पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 कैटेगरी में विभिन्न जिलों, ब्लॉकों, पंचायतों और वीसी को पुरस्कृत किया गया और कर्मचारियों को भी विभिन्न कैटेगरी में उनके प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया गया, जिसमें 9 अलग-अलग कैटेगरी में पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार शामिल है। मुख्यमंत्री और अन्य मेहमानों ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। कार्यक्रम में चर्चा में पंचायत मंत्री किशोर बर्मन ने कहा कि सीमित संसाधन कभी भी विकास की राह में बाधा नहीं बन सकते। इसका एक अच्छा उदाहरण त्रिपुरा राज्य है। एक छोटा और पहाड़ी राज्य होने के बावजूद, त्रिपुरा कई क्षेत्रों में राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने में सक्षम है।
इसलिए कहा जा सकता है कि अगर अकाउंटेबिलिटी, ट्रांसपेरेंसी, ईमानदार लीडरशिप और दूरगामी प्लान हों, तो कोई भी रुकावट बड़ी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की मुख्य ताकत गांवों में है। सरकार तभी सफल होती है जब आम आदमी को लगे कि सरकार उसके साथ है। पंचायत के सदस्य गांवों में सरकार का चेहरा होते हैं। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अभिषेक सिंह ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिला परिषदों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विभिन्न पंचायतों के प्रमुख और उप प्रमुख, साथ ही जिला मजिस्ट्रेट, BDO और विभिन्न स्तर के अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम में कई डॉक्यूमेंट्री दिखाई गईं।








