
9वां इंडिया फार्मा सम्मेलन 2026 नई दिल्ली में 13-14 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा
ऑनलाइन डेस्क, 30 मार्च, 2026: केन्द्र सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत काम करने वाला औषध विभाग फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) और इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस (आईपीए) के सहयोग से इंडिया फार्मा 2026 का 9वां संस्करण 13-14 अप्रैल, 2026 को, नई दिल्ली स्थित फेडरेशन हाउस में आयोजित करेगा। यह सम्मेलन क्षेत्र को मात्रा-आधारित उद्योग से मूल्य एवं नवाचार-आधारित वैश्विक शक्ति में रूपान्तरित करने के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करेगा।
‘भारत में खोज करना: जीवन विज्ञान नवाचार में अभूतपूर्व प्रगति‘ विषय के साथ आयोजित यह सम्मेलन भारत को औषधि और जीवन विज्ञान क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। यह विषय स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने, नवाचार को गति देने और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह आयोजन नीति-निर्माताओं, वैश्विक उद्योग जगत के दिग्गजों, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों सहित प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाएगा, जहां वे औषधि खोज , जटिल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर के क्षेत्र में उभरते अवसरों पर विचार-विमर्श करेंगे। साथ ही, यह सम्मेलन भारत की मजबूत विनिर्माण क्षमताओं और तेजी से विस्तारित हो रहे अनुसंधान एवं विकास इकोसिस्टम को भी प्रदर्शित करेगा, जिससे वैश्विक फार्मास्युटिकल मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति और सुदृढ़ होगी।
इंडिया फार्मा 2026 एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की औषधि क्षेत्र की क्षमता को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा सहयोग और नीतिगत संवाद के माध्यम से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना है।
फिक्की (एफआईसीसीआई), जिसकी स्थापना 1927 में हुई थी, भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा शीर्ष व्यावसायिक संगठन है। यह एक गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी संस्था है, जो भारत के उद्योग और व्यवसाय की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती है। फिक्की अपने देशव्यापी क्षेत्रीय चैंबरों के विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से 2,50,000 से अधिक कंपनियों,जिनमें कॉर्पोरेट इकाइयां और बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं, का प्रतिनिधित्व करती है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन काम करने वाला औषध विभाग लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों, अवसंरचना विकास एवं उद्योग-अकादमिक साझेदारियों को सुदृढ़ करके फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के व्यापक विजन के अनुरूप है।
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