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रवींद्र कानन में फूलों और बहारी पत्तों की प्रदर्शनी: राज्य में अब 59,100 लोग फूलों की खेती कर रहे हैं: कृषि मंत्री

ऑनलाइन डेस्क, 24 जनवरी, 2025: राज्य के किसान आज अलग-अलग फूलों और बहारी पत्तों की कमर्शियल खेती करके आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। अगर किसान समुदाय आत्मनिर्भर नहीं होगा, तो देश और राज्य आत्मनिर्भर नहीं हो सकते। कृषि और कृषि से जुड़े सेक्टर राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं। केंद्र और राज्य सरकारों ने किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कई प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। कृषि और किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने कल अगरतला के रवींद्र कानन में आयोजित 4 दिन की 40वीं सालाना फूल और बहारी पत्तों की प्रदर्शनी और प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। प्रदर्शनी का आयोजन त्रिपुरा उद्यान पालन समिति ने किया था। प्रदर्शनी में 196 किसानों ने कुल 723 एग्ज़िबिट पेश किए। प्रदर्शनी रोज़ दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक खुली रहेगी। यह 26 जनवरी तक चलेगा।

इस एग्ज़िबिशन और कॉम्पिटिशन का उद्घाटन करते हुए कृषि और किसान कल्याण मंत्री रतनलाल नाथ ने कहा, ऐसे फूलों के मेले हमारे मन को शांति देते हैं। इसलिए, हर घर में फूलों की खेती करना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, फूलों की खेती आज खेती पर आधारित इंडस्ट्री बन गई है। आज कई युवाओं, किसानों और महिलाओं ने फूलों की खेती को प्रोफ़ेशन के तौर पर अपनाया है। इस बारे में उन्होंने कहा, पहले 2738 कनी में फूलों की खेती होती थी। अब यह 11,820 कनी में हो रही है। पहले राज्य में 2190 फूल उगाने वाले थे। अब 51,100 लोग फूलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ने लेंबुचरा में 65 कनी ज़मीन पर अलग-अलग तरह के फूलों की खेती के लिए ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ बनाने की पहल की है। इसे इंडो-डच प्रोजेक्ट के तहत बनाया जाएगा।

इसके अलावा, बाधरघाट में 400 स्क्वायर मीटर एरिया में ऑर्किड और अलग-अलग तरह के फूलों की खेती करने की पहल की गई है। विशालगढ़ अनुमंडल के लक्ष्मीबिल में 130 कनीय जमीन पर 300 परिवार फूलों की खेती से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, एक समय था, जब विभिन्न आयोजनों के लिए बड़ी संख्या में फूल राज्य के बाहर से आयात करने पड़ते थे। लेकिन आज हमारे राज्य के किसान ग्लेडियोलस, गुलदाउदी, सूरजमुखी, विभिन्न प्रकार के गदा, एंथेरियम और विभिन्न पत्तेदार सब्जियों की खेती करके आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, पहले राज्य में फूलों की मांग का 25 प्रतिशत उत्पादन होता था। अब यह 43 प्रतिशत है।

हम उत्पादन को और बढ़ाना चाहते हैं। अपने विशेष अतिथि भाषण में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव और त्रिपुरा उद्यान पालन समिति के अध्यक्ष अपूर्व रॉय ने कहा कि फूलों की खेती के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। त्रिपुरा उद्यान पालन समिति के सचिव और बागवानी एवं भूमि संरक्षण विभाग के उप निदेशक सुजीत दास ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने संघ की स्मारिका का अनावरण किया। प्रोग्राम की शुरुआत में ‘वंदे मातरम’ गाना बजाया गया। अगरतला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मेयर और MLA दीपक मजूमदार, हॉर्टिकल्चर और लैंड कंज़र्वेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. फणीभूषण जमातिया और दूसरे लोग मौजूद थे। एक रंगारंग कल्चरल प्रोग्राम भी रखा गया। हॉर्टिकल्चर और लैंड कंज़र्वेशन डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर सुब्रत दास ने धन्यवाद दिया।

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