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वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ, यह समारोह हमारी भावी पीढ़ियों में देशभक्ति की भावना जागृत करने की एक नई प्रतिबद्धता है: मुख्यमंत्री

ऑनलाइन डेस्क, 08 नवंबर, 2025: ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारत के लोगों के स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ गीत को मुक्ति का मंत्र माना जाता है। असमूद्र हिमाचल भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाने में ‘वंदे मातरम’ गीत का योगदान अविस्मरणीय है।  मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा ने यह बात आज सचिवालय परिसर में वंदे मातरम गीत की रचना की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राज्यव्यापी कार्यक्रम में भाग लेते हुए कही। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। फिर इस गीत की पृष्ठभूमि पर एक लघु वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम के अवसर पर 150 कलाकारों ने वंदे मातरम गीत की प्रस्तुति दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक केंद्रीय समारोह में राष्ट्र को संबोधित किया। सचिवालय में आयोजित समारोह में समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। समारोह के महत्व का विश्लेषण करते हुए मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने कहा कि एक अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मनाने का निर्णय लिया। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करते हुए पूरे देश में इसकी 150वीं वर्षगांठ मनाने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी ने सात नवंबर 1875 को ‘वंदे मातरम’ की रचना की थी।

1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में यह गीत गाया था। धीरे-धीरे इस गीत की लोकप्रियता बढ़ती गई और यह स्वतंत्रता सेनानियों के लिए मुक्ति का मंत्र बन गया। 1905 में बंगाल विभाजन के खिलाफ इस गीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आजाद-हिंद सरकार की घोषणा के दौरान भी ‘वंदे मातरम’ गीत गाया गया था। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में आगे कहा कि 24 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने गण परिषद में कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम’ की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान को समान दर्जा मिलेगा और समान रूप से सम्मान मिलेगा।

इस अवसर को मनाने के लिए किए गए विभिन्न कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा ने कहा कि 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में चार चरणों में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से ‘वंदे मातरम’ गीत की रचना की 150वीं वर्षगांठ मनाने की पहल की गई है। आज राज्य के सभी जिला मुख्यालयों, सभी अनुमंडलों और प्रखंडों के साथ-साथ सभी नगरपालिका और शहरी स्थानीय निकायों में भी ‘वंदे मातरम’ गीत की रचना की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।

‘वंदे मातरम’ के महत्व को सभी स्तरों तक पहुँचाने के लिए, वर्ष भर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ पर विशेष सभाएँ, निबंध प्रतियोगिताएँ, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, पोस्टर मेकिंग, क्विज़ आदि आयोजित किए जाएँगे। राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर ‘वंदे मातरम’ और अन्य देशभक्ति गीतों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूलों, कॉलेजों, एनसीसी आदि के बैंडों द्वारा परिसरों में ‘वंदे मातरम’ पर प्रदर्शनियाँ, मशाल दौड़, वृक्षारोपण अभियान, युवा मैराथन और ‘वंदे मातरम’ संगीत समारोह आयोजित किए जाएँगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्सव हमारी भावी पीढ़ियों में देशभक्ति की भावना जागृत करने की एक नई प्रतिबद्धता है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि ‘वंदे मातरम’ गीत की रचना की 150वीं वर्षगांठ मनाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आह्वान सभी भारतीयों में देशभक्ति की एक नई भावना जागृत करेगा।अंत में, मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने समारोह स्थल पर आयोजित वंदे मातरम गीत पर आधारित एक फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों में मुख्य सचिव जे.के. सिन्हा, सूचना एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. पी.के. चक्रवर्ती, मुख्य सचिव, सचिव, निदेशक सहित राज्य प्रशासन के सभी स्तर के अधिकारी शामिल थे।

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