
विगत में जो भाषाएं लुप्त हुई हैं, उनके लिए प्रशासन जिम्मेदार है, मातृभाषा को न भूलें, मातृभाषा के माध्यम से लोग अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं: मंत्री रतन लाल नाथ
ऑनलाइन डेस्क, 21 फरवरी 2025: यदि हम अपनी मातृभाषा के प्रति जागरूक नहीं हुए तो अगली सदी में 75 प्रतिशत भाषाएं विलुप्त हो जाएंगी और अतीत में जो भाषाएं लुप्त हुई हैं, उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है। कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने शुक्रवार को अगरतला टाउन हॉल में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की रजत जयंती समारोह के अवसर पर यह बयान दिया। समारोह का उद्घाटन दीप प्रज्वलित करके किया गया। मंत्री ने कहा कि मातृभाषा में बहुत गहराई होती है।
इसलिए, सभी को मातृभाषा को समृद्ध बनाने और दूसरों की भाषाओं का सम्मान करने के प्रति जागरूक होना चाहिए। देश-दुनिया में जिन लोगों ने प्रसिद्धि हासिल की है, उन्हें प्रसिद्ध होने के लिए अंग्रेजी सीखने की जरूरत नहीं पड़ी। रूस और चीन अंग्रेजी नहीं बोलते। फिर भी ये देश आज विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि मातृभाषा के प्रति रुचि पैदा करने में माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत में 22 भाषाएँ बोली जाती हैं।
राज्य सरकार भविष्य में कोकबोरोक भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करने का प्रयास कर रही है। क्योंकि त्रिपुरा के नौ लाख 57 हजार लोग कोकबोरोक भाषा बोलते हैं। दुनिया भर में 230 मिलियन लोग बंगाली भाषा बोलते हैं। हमें अपनी मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि इसे खोना ख़तरा है। लोग अपनी भावनाओं को अपनी मातृभाषा के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं।
जो अन्य भाषाओं में संभव नहीं है। इसलिए मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा कि आने वाले दिनों में मातृभाषा को आगे बढ़ाने के लिए सभी को अधिक रुचि और उत्साह दिखाना होगा। इस कार्यक्रम में अगरतला नगर निगम के महापौर दीपक मजूमदार, पद्मश्री से सम्मानित त्रिपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति अरुणोदय साहा और विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे।








