
पूर्व उपमुख्यमंत्री, त्रिपुरा का इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत शास्त्रीय संगीत संध्या कार्यक्रम में त्रिपुरा की पहचान को आगे बढ़ा रहे हैं
ऑनलाइन डेस्क, 12 जनवरी 2023: इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और साहित्य त्रिपुरा की पहचान रखते हैं। रवीन्द्र संगीत, शास्त्रीय संगीत, लोक संस्कृति त्रिपुरा की सांस्कृतिक आत्मा का हिस्सा हैं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री यशु देबवर्मा ने आज रवीन्द्र शताब्दी भवन में शास्त्रीय संगीत के शाम के कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।
सूचना एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने 9 जनवरी को दिवंगत उस्ताद राशिद खान के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
सूचना एवं संस्कृति विभाग द्वारा राज्य की प्रख्यात शास्त्रीय संगीत कलाकार कनिका देववर्मन को शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
शास्त्रीय संगीत संध्या का उद्घाटन करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री यशु देबवर्मा ने राजन्य काल की सांस्कृतिक प्रथाओं को याद किया और कहा कि राज्य के सांस्कृतिक वातावरण में शास्त्रीय संगीत की परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए सांस्कृतिक आंदोलन की आवश्यकता है।
ऐसे में राज्य सरकार को शास्त्रीय संगीत के लिए मंच तैयार करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कार्यक्रम में उन्होंने राज्य सरकार के साथ-साथ सांस्कृतिक हस्तियों से भी राज्य में शास्त्रीय संगीत का चलन बढ़ाने के लिए आगे आने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में बोलते हुए राज्य सांस्कृतिक सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष सुब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि सलाहकार समिति राज्य की पारंपरिक और शास्त्रीय शैलियों की सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।
सूचना एवं संस्कृति विभाग के निदेशक बिम्बिसार भट्टाचार्य ने अपने स्वागत भाषण में कार्यक्रम के आयोजन में मदद के लिए संगीत नाटक अकादमी और एनईजेडसीसी को धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर विधायक मीनारानी सरकार और वरिष्ठ तबला कलाकार गोपाल चंद्र विश्वास सहित अन्य उपस्थित थे। कोलकाता शास्त्रीय संगीत के पंडित संदीपन समाजवादी, दिल्ली के पंडित राजेंद्र प्रसन्ना बांसुरी और अगरतला के देवज्योति दासगुप्ता तबला, डॉ. अनिर्बान बिस्वास बेहाला और डॉ. देवज्योति लस्कर ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया।







