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विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम के विचार आज भी प्रासंगिक: मुख्यमंत्री

ऑनलाइन डेस्क, 25 मई 2024: विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम के विचार आज भी प्रासंगिक हैं. उन्होंने समाज के कल्याण के लिए कई कार्य किये हैं। काजी नजरूल इस्लाम के मानवता की जीत के गीत को वर्तमान पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा ने आज योगेन्द्रनगर के रेंटर्स कॉलोनी में विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम की पूर्ण लंबाई वाली प्रतिमा का अनावरण करते हुए यह बात कही।

भारत-बांग्ला मैत्री संसद की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नजरूल की विद्रोह की भावना हमेशा उनके गीतों, कविताओं और लेखों के माध्यम से व्यक्त होती रही है।

नज़रुल इस्लाम द्वारा रचित ग़ज़लें एक दिव्य एहसास पैदा करती हैं गरीबी में रहते हुए भी उन्होंने गरीब लोगों के लिए संघर्ष किया नजरूल के जीवन और साहित्य को नई पीढ़ी के सामने और अधिक प्रस्तुत किया जाना चाहिए तभी उसे सच्चा सम्मान दिया जा सकता है।

इस कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री सुशांत चौधरी, अगरतला पूर्णिगम के मेयर दीपक मजूमदार, राज्य के महाधिवक्ता सिद्धार्थ शंकर डे और अन्य भी उपस्थित थे।

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